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समस्तीपुर: बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूटी, सिंघिया प्रखंड में रबी फसल तबाह
- Reporter 12
- 23 Mar, 2026
गेहूं-मक्का की फसल बर्बाद, खेतों में पानी भरने से बढ़ी चिंता; मौसम विभाग की नई चेतावनी से किसान दहशत में
समस्तीपुर: बिहार में बीते 24 घंटों के भीतर बदले मौसम ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। खासकर समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखंड में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी रबी फसल को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। किसान अपनी महीनों की मेहनत को यूं बर्बाद होते देख टूट चुके हैं और कई जगहों पर भावनात्मक रूप से बिखरते नजर आ रहे हैं।
पिछले दो दिनों में हुई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने लगभग तैयार फसलों को खेतों में ही गिरा दिया है। गेहूं, मक्का और सरसों की फसलें जो कटाई के कगार पर थीं, अब पानी में डूब चुकी हैं या जमीन पर बिछ गई हैं। सिंघिया प्रखंड के कई गांवों में खेतों का नजारा ऐसा है जैसे किसी ने हरी फसल पर कहर बरपा दिया हो।
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार मौसम ने पूरी तरह धोखा दे दिया। जिन फसलों को देखकर उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, वही अब उनके लिए संकट बन गई है। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब उनके सामने कर्ज चुकाने का भी संकट खड़ा हो गया है।
खेतों में पानी भर जाने के कारण गेहूं के दानों के काले पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कृषि जानकारों के अनुसार, यदि पानी जल्द नहीं निकला तो फसल पूरी तरह खराब हो सकती है। वहीं, जो फसलें गिर गई हैं, उनके दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएंगे, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि बागवानी फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। आम और लीची के पेड़ों पर आए मंजर तेज हवा और ओलों के कारण झड़ गए हैं। इससे आने वाले दिनों में फल उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। सिंघिया और आसपास के क्षेत्रों में कई बागवानों ने बताया कि इस बार की फसल से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अब हालात निराशाजनक हो गए हैं।
समस्तीपुर के ग्रामीण इलाकों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई किसान अपनी बर्बाद फसल देखकर खेतों में ही रोने लग रहे हैं। कुछ स्थानों पर किसानों के बेहोश होने की भी खबरें सामने आई हैं। यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के मनोबल पर भी गहरा आघात है।
जिले के अन्य प्रखंडों की तुलना में सिंघिया क्षेत्र में नुकसान ज्यादा बताया जा रहा है। यहां जलजमाव की समस्या अधिक है, जिसके कारण खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहता है। इस बार की बारिश ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। कई गांवों में खेत पूरी तरह तालाब में तब्दील हो गए हैं, जिससे फसल बचाने की कोई संभावना नहीं बची है।
इस प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। फसल खराब होने से बाजार में अनाज की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और किसानों की क्रय शक्ति भी घटेगी, जिससे स्थानीय कारोबार पर असर पड़ना तय है।
प्रशासन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिला कृषि विभाग की ओर से फसल क्षति का आकलन करने के लिए सर्वे कराने का निर्देश दिया गया है। अधिकारी गांव-गांव जाकर नुकसान का आंकलन करेंगे, ताकि प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता मिल सके। हालांकि किसानों का कहना है कि सिर्फ सर्वे से काम नहीं चलेगा, बल्कि मुआवजा जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठने लगी है। जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों को तत्काल राहत दी जाए और उनकी फसलों के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली, तो उनके लिए अगली फसल की तैयारी करना भी मुश्किल हो जाएगा।
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए फिर से मौसम खराब रहने की चेतावनी जारी की है। 26 से 28 मार्च के बीच तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है। हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो बची-खुची फसल के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती है।
मौसम विभाग की इस चेतावनी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। जो फसलें अभी किसी तरह खड़ी हैं, उनके भी नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और दुआ कर रहे हैं कि मौसम अब और खराब न हो।
कुल मिलाकर समस्तीपुर, खासकर सिंघिया प्रखंड में किसानों के सामने इस समय भारी संकट खड़ा हो गया है। एक ओर फसल बर्बाद हो चुकी है, दूसरी ओर भविष्य की अनिश्चितता ने उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से झकझोर दिया है। अब सबकी नजर सरकार और प्रशासन पर टिकी है कि वे इस मुश्किल घड़ी में किसानों को कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी राहत दे पाते हैं।
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